कामरेड


मैंने उससे कहा
तुम चुन लो
कि तुम्हें क्या चाहिए
आज की शाम
या तो तुम एक नाटक लिखोगे
या फिर गुरुद्वारे में जाकर रहोगे
शाम हुई
मैंने उससे फिर पूछा
तुमने क्या चुना
उसने कहा - सड़क!
मैं फिर उसके साथ चल पड़ा।

 - मनीष कुमार यादव
04.08.2016

किसी को दे दो दिल

किसी को दे दो दिल, किसी पे जां निसार करो
तुम्हारे बस में ही कहां है किसी को प्यार करो 

मुकम्मल हो तो जाएं, यूं सोहबत में तुम्हारी
तुम्हें गंवारा ही कहां कि ये इंतज़ार करो 

 महकमों में बिक गई है सियासत वतन की
अपने ही लोगों पे भी ज़रा कम एतबार करो

है सबकी नज़र पर नज़र, और ज़ुबां पर ज़ुबां
यहां संभलकर चलो, ज्यों निगाह-ए-यार करो

किसी को दे दो दिल, किसी पे जां निसार करो
तुम्हारे बस में ही कहां है किसी को प्यार करो

03.07.2017

ए बाबू...

क्या मेरा यही कर्तव्य है
कि चुपचाप बैठा रहूँ अपनी झोपड़ी में
इंतज़ार करूँ, कि फ़ौजें आ धमके मेरे घर में
इंतजार करुँ, कि वो आएं, और
मेरे छत की पुआल बने
चुल्हा बनाई गई मेरी मड़ई का इंधन
उनकी मीट-भात-दारू की पार्टी को दान कर दूँ
मेरे बच्चों के लिए दूध देने वाली
उन दो बकरियों को, जिनके एवज में
गिरवी गए थे, मेरी पत्नी के सारे गहने
इंतजार करूँ, कि वो आएं
और मैं उनके सुपुर्द कर दूँ
अपनी माओं-बहनों-बेटियों की आबरु
इंतजार करूँ, कि वो आएं
और मैं अपनी जमीन, अपना जंगल
उस सरकार को दान दे दूँ , जिसका
यथार्थ से कोई, सरोकार नहीं
लोगों का, लोगों के लिए, लोगों के द्वारा
बसाया गया श्मसान
जहाँ अब लोगों का ही कुछ नहीं रहा
ए बाबू...
एक बात जान लो
मेरा घर, मेरे बच्चे, मेरी माएँ-बहनें-बेटियाँ
मेरा जंगल, मेरी जमीन
किसी के बाप की जागीर नहीं हैं
तुम्हारे बंदूकों की गोलियाँ अगर भेद करना नहीं जानतीं
तो उन्हें भी दो ट्रेनिंग
देशवासी और दशद्रोही में फ़र्क करने का
वरना मेरी बंदूक, और उसकी गोलियाँ...
तुम्हें हर संभव जवाब देने में
सक्षम हैं।

05.05.2015

मैं सपने में हत्याएँ करता हूँ

मैं सपने में हत्याएँ करता हूँ
मैं जानता हूँ
हत्याएं करना अच्छी बात नहीं है
शायद इसलिए मैं देख नहीं पाता
कि मेरी हत्याओं का भुक्तभोगी कोन है
ठीक-ठीक कुछ भी, चिन्हित नहीं होता
मगर साथ ही
मैं यह भी जानता हूँ
कि मैं किसी व्यक्ति विशेष की
हत्या की नीयत नहीं रखता
मैं चाहता हूँ करना विद्रोह
और ख़त्म कर देना चाहता हूँ
दुनिया भर की
सारी विसंगतियां, सारी कुंठाएं
सारा लोभ, सारी नफ़रत
और वो सबकुछ, जो हमें
एक अदद इंसान बनने से

दूर रखती है।

05.05.2015